VIDEO: 26/11 धमाके के 8 साल बाद भी सबीरा को जिंदगी की तालाश

मुंबई: 26 नवंबर 2008 ऐसी तारीख है जिसे कोई नहीं भूल सकता और इसे याद करने पर वो सारे जख्म ताजा हो जाते हैं जो बेहद दर्द देते हैं। कुछ ऐसी दर्द भरी कहानी है सबीरा खान की जो इस दर्द को रोज जीती है।

सबीरा की कहानी फेसबुक पर इन दिनों काफी वायरल हो रही है। 26 नवंबर 2008, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने घर वापिस लौट रही सबीरा खान जैसे ही डॉक्यार्ड रोड पर पहुंची तो एक टैक्सी में हुए बम धमाके ने उन्हें अपनी जगह से 20 फीट दूर फेंक दिया। धमाके के बाद सबीरा की जब आंखें खुली तो उसने खुद को एक सरकारी अस्पताल में पाया जहां उनका 2 महीने तक इलाज चला। सबीरा आज भी अपने पैरों पर चल नहीं पाती हैं।  बैसाखी के साहरे से ही वे कहीं आती-जाती है। सबीरा बताती हैं सरकारी अस्पताल में उनका इलाज ठीक से नहीं किया गया। उन्हें जो खून चढ़ाया गया था वह पीलिया से इंफेक्टिड था जिसने उनके पैर को हमेशा के लिए खराब कर दिया। सबीरा अलग-अलग अस्पतालों में 6 सर्जरी करा चुकी हैं लेकिन उनका पैर ठीक नहीं हो सका।

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