प्रद्युम्न के दोस्त का खुलासा, ‘स्कूल ने खून से सने बैग-बोतल बच्चों से धुलवाए’

रायन स्कूल की लापरवाही प्रद्युम्न की मौत की वजह बन गई. बच्चे की मौत के बाद स्कूल स्टॉफ की हरकतों ने वहां मौजूद मासूमों के दिलों में और भी डर भर दिया है. आलम ये हैं कि कई बच्चे अब किसी भी सूरत में स्कूल जाने को तैयार नहीं हैं.

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गुरुग्राम: रायन स्कूल की लापरवाही प्रद्युम्न की मौत की वजह बन गई. बच्चे की मौत के बाद स्कूल स्टॉफ की हरकतों ने वहां मौजूद मासूमों के दिलों में और भी डर भर दिया है. आलम ये हैं कि कई बच्चे अब किसी भी सूरत में स्कूल जाने को तैयार नहीं हैं. एबीपी न्यूज पर स्कूल में प्रद्युम्न के दोस्त ने उस खौफ के मंजर को बयां किया है.

प्रद्युम्न के दोस्त ने किया बड़ा खुलासा

प्रद्युम्न के दोस्त ने खुलासा किया है, ‘’मर्डर के बाद प्रद्युम्न का खून से सना बैग हम बच्चों के बीच ही लाकर रख दिया गया था.’’ स्कूल प्रशासन की इस लापरवाही को अगर नजरअंदाज भी कर दिया जाए तो उस गुनाह को बिल्कुल भी नहीं बख्शा जा सकता, जिसका जिक्र ये बच्चा बार-बार कर रहा है.

बच्चे ने बताया, ‘’जब में क्लास में आया तभी मुझे प्रद्युम्न का बैग और बॉटल खून से सने हुए दिखे थे. उन्होंने एक लड़के से बोतल साफ करवाई. वो बैग और बोतल धोकर ले आया और एक लड़की से बैग से सारी बुक्स निकलवा ली थी.’’

एक शख्स ने पहले ही कर दिया था ये खुलासा

इससे पहले सुबोध कुमार नाम के एक शख्स ने एबीपी न्यूज़ पर खुलासा किया था, ‘’मेरी बेटी भी रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ती है. उसने मुझे बताया है कि कल एक मेड क्लास में आई और प्रद्युम्न के बैग से डायरी निकाल कर देने को कहा.’’ उन्होंने बताया, ‘’बच्चों को प्रद्दयुमन की पानी की बोतल देकर बाथरूम में भेजा गया और उसपर लगे खून के धब्बे साफ कराए. यह सब देखने के बाद मेरी बच् मेरी बच्ची सहमी हुई है. उसे समझ नहीं आ रहा कि आख़िर हुआ क्या है.’’

किसी भी सूरत में स्कूल जाने को तैयार नहीं हैं बच्चे

प्रद्युम्न की हत्या के बाद बच्चों से ही खून सनी बॉटल साफ कराई गई. टीचर ने एक बार भी नहीं सोचा कि मासूम मन पर इस घिनौनी हरकत का क्या असर होगा. बच्चों की दिल में ये घटना किस कदर डर पैदा कर देगी. उस खौफनाक मंजर को देखने वाले बच्चे अब किसी भी सूरत में स्कूल जाने को तैयार नहीं है.

बच्चे का कहना है, ‘’अब स्कूल से डर लगाता है. प्रद्युम्न के जैसे ही, जैसे उसका गला काट दिया वैसे मेरा भी कोई गला काट देगा.’’ डर केवल बच्चों के मन में ही नहीं है, मां-बाप भी मासूमों की सुरक्षा की गारंटी चाहते हैं. उन्हें डर है कि स्कूलों का लापरवाह रवैया फिर किसी बच्चे की जान का दुश्मन न बन जाए.

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